Guide: DM Kaise Bane जानिए पूरी जानकारी हिंदी में

आज हम बात करने वाले है DM kaise bane इसके बारेमें अगर आप इसके बारेमें पूरी जानकारी अगर जानना चाहते है तो आप हमारे इसी पोस्ट को पूरा पढ़िए इसमें हमने आपको पूरी जानकारी दी है । अगर आपको इसी प्रकार के चीजें जैसे की एक्टर कैसे बने जैसे चीजों पे ज्यादा जानकरी जानना चाहते है तो आप हमारे वेबसाइट में पढ़ सक्ते है ।

District magistrate जिसे हम शॉर्ट में डीएम भी कहते हैं। डीएम बनने के लिए पूरी जानकारी जानने के लिए हमारी पोस्ट के अंत तक बने रहे। यदि आप dm पद पर नियुक्त है या फिर dm पत्र से अभी तक परिपूर्ण नहीं है। तो आप को भी इस बात का पता होगा कि डीएम को जिले का पावरफुल व्यक्ति माना जाता है। पूरी देखरेख की जिम्मेदारी डीएम पर ही नियुक्त होती है। किसी भी घटना या कीर्तिओं पर हुए कार्यों की जिम्मेदारी जिले के डीएम पर ही होती है।

DM Kaise Bane ?

DM Kaise Bane

DM kaise bane इसके बारेमें हमने निचे पुरे जानकारी दी है जिसे आप देख सकते है और आप उन्ही साडी तरीकों को अपनाके के आप district magistrate बनने की तैयारी कर सकते है ।

तीन चरणों की परीक्षा देने के बाद छात्राओं को सिलेक्ट किया जाता है। सबसे पहले आपको UPSC में IAS बनने का फॉर्म बरना होगा और उसके बाद आपको आईएस के syllabus की जानकारी भी होना बहुत ही जरूरी है। Syllabus के ही आधार पर आप अपनी किताबों की पुष्टि करते है। सबसे अहम बात आपको रोजाना मैगजीन और अखबार पढ़ते रहना है। क्योंकि आपको हर खबर से अपडेट रहना है। इसीलिए क्योंकि आपको यह मालूम होना चाहिए कि सरकार की नई-नई नीति और उनके कार्य क्या है, जो आप के डीएम बनने के लिए बहुत ही महत्व और आवश्यक है। इसीलिए रोजाना मैगजीन अखबारों को पढ़ते रहें।

DM कार्यकाल

डीएम के कुछ महत्वपूर्ण अधिकार है जिनको उस को भलीभांति संपूर्ण करना होता है जैसे।

  • सरकार का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि होने के नाते आम जनता के साथ सीधे संपर्क में रहना डीएम का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।
  • Dm के नेतृत्व में सरकारी कार्य और पुलिस के नेतृत्व का गठन होता है।
  • जिला अधिकारी के रूप में विकास उपध्यज  विकास का कार्य करना होता है।
  • पंचायत स्थानीय निकाय योग्य नागरिक प्रशासन की जिम्मेदारियों को निभाना होता है।

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Dm उपायुक्त के रूप में

  • नागरिक प्रशासन विकास पंचायत स्थानीय निकायों आदि के क्षेत्र में कई जिम्मेदारियों को अपनी निगरानी में रखना अनिवार्य है।
  • लिपिक स्टाफ के काम की निगरानी के लिए उपयुक्त के पास एक कार्यकाल अधीक्षक है।
  • डीएम अपने कार्यकाल की विभिन्न शाखाओं के कामकाज का मार्गदर्शन करता है।
  • विविध सहायक के तहत एमए शाखा आदि के रूप में जाना जाता है।

Dm सहायक के दो प्रकार के काम है

  • सहायक को दो प्रकार के कार्य पर्यवेक्षी और डिस्पोजेबल अर्थात उसे उनके अधीन काम करने वाले अधिकारियों के काम की निगरानी करना होगा।
  • कई स्तरों पर उसके स्तर पर या फिर उसके वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए उन्हें नियुक्त होना होगा।
  • एक सहायक के पास उसके एक या एक से अधिक कर्तव्य होते  हैं।
  • सरकार के द्वारा दी गई शुल्क और सभी देय राशि के संग्रह के लिए जिम्मेदार होता है।

 Dm की कानूनी व्यवस्था पर टिप्पणी

  • कानून के रखरखाव का जिम्मेदार डीएम ही होता है।
  • कार्य को नेतृत्व करना है और उसको नियुक्त करने का निश्चित दिन डीएम द्वारा ही नियुक्त किया जाता है।
  • अधिनियम 1954 के तहत कस्टोडियन  के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Dm का ऑफिस वर्क

  • डीएम का कार्य 24 घंटों का होता है आपको प्रशासनिक कार्यों पर निगरानी करने के लिए अपना पूरा वक्त देना होता है यानी 24 घंटे आपको एक्टिव रहना है।
  • इसीलिए डीएम को जिले के पास में ही एक आवाज दिया जाता है जहां पर वह रहकर अपने कार्यों को कर सकता है। आम भाषा में बोले तो पूरे दिन ही आपको अपने जिले के लिए देना होगा।
  • डीएम के ऑफिस पहुंचने का वक्त 10:00 से शाम के 5:00 बजे का होता है 10:00 बजे ऑफिस पहुंचना अनिवार्य है।
  • जिले के लोग इस टाइम पर आकर अपनी समस्या परेशानी है। जो कहीं और सुनी ना जा रही हो। वह अपनी समस्याओं को डीएम के पास ले जा सकते हैं डीएम इसका हल निकालता है।
  • ऑफिस में डीएम अपने से नीचे पोस्ट वाले लोगों के साथ समय निकालकर उनसे मीटिंग करते हैं। साथ ही साथ उन्हें निर्देश देते हैं और  जिले के कार्य की पूरी जानकारी लेते हैं।
  • डीएम को इस प्रकार का अधिकार प्राप्त होता है कि वह अपने किसी भी ऑफिसर को बुलाकर अपने ऑफिस में उसके साथ मीटिंग कर सकता है। किसी भी ऑफिसर या पुलिस को छुट्टी की दरखास्त लगाने के लिए डीएम से अनुमति की आवश्यकता होती है। और भी अन्य महत्वपूर्ण कार्य है जो डीएम अपने अंतर्गत पूर्ण करवाता है।

Dm के फील्ड कार्य

  • कई बार ऐसा हो जाता है कि किसी घटना के कारण जनता प्रदर्शन करना शुरू कर देती है। ऐसे में डीएम का यह कर्तव्य है कि  उस स्थान पर हुई घटना को जाने और जनता से वार्तालाप कर उन समस्याओं को दूर करने की पूरी कोशिश करें।
  • डीएम का मुख्य कार्य माहौल को सुधारे रखना है। किसी भी कारण अगर माहौल खराब हो रहे है तो डीएम को खुद जाकर उन समस्याओं को देखना चाहिए और उन में सुधार लाने की पहल दिखानी चाहिए।
  • डीएम को अपने क्षेत्र में साफ-सफाई का भी खास ख्याल रखना चाहिए। सरकारी  कार्यकर्ताओं की टाइमिंग का भी ध्यान रखना होगा कि वह  किस समय अपने कार्य को पूरा करता है। यदि सरकारी नागरिक काम करने में हिचकिचाहट  या फिर अपना कार्य नहीं करते तो डीएम उनको उनके पद से सस्पेंड भी कर सकता है।
  • कई  बार जिले की जनता की कुछ मांगे होती है। जिन को पूरा करना डीएम का कर्तव्य है।  डीएम को चाहिए कि उन लोगों तक उनकी आपूर्ति की जानकारी हासिल करें और उनकी पूर्ण रूप से सहायता करने की पूरी कोशिश करें।
  • एक अच्छा जिला अधिकारी अपने जिले का भविष्य सुधार सकता है। इसीलिए अपने कार्य को उसको पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी से पूर्ण करना चाहिए। क्योंकि आजकल ऐसा बहुत ही कम हो रहा है कि लोग अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और सही ढंग से निभाएं। एक सही जिला अध्यक्ष पूरे  जिले के भविष्य में सुधार ला सकता है। जिले के लोगों का जीवन बना सकता है। इसीलिए डीएम को अपने कार्य को बखूबी निभाना चाहिए ताकि लोगों को सही मार्गदर्शन प्राप्त हो।

Conclusion

हम उम्मीद करते हैं कि हमारी इस पोस्ट में  DM kaise bane जुड़ी सभी प्रकार की जानकारियां हासिल होगी. हमने अपनी इस पोस्ट में जिला अधिकारी के कार्य पर प्रकाश डालते हुए उनके कार्यों पर विशेष टिप्पणी दी है। जिनसे आप उनके अधिकारों को बेहतर तरीके से जान पाएंगे और यह जानकारी भविष्य में आपके काम आएगी।

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