विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध स्थल ?

आज हम इस आर्टिकल में विश्व के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र के बारे में जानकारी दूं रहे हैं। तो अगर आप भी इस युद्ध स्थल के बारे में  जानना चाहते हैं और अपने जनरल नॉलेज को बढ़ाना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को जरूर अंत तक जरुर पड़े।

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विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध स्थल कौनसा है

vishva ka sabse uncha yudh sthal

 विश्व के सबसे ऊंचे युद्ध स्थल हमारे देश में ही मौजूद है। जहां पर अक्सर भारतीय सैनिक द्वारा दूसरे देशों के सैनिकों से युद्ध लड़ा होता रहता है।

विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध स्थल है सियाचिन ग्लेशियर जो कि देश के काराकोरम पर्वत श्रेणी में स्थित है। यह पर्वत श्रेणी भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य में स्थित है। यहां पर भारतीय सैन्य द्वारा विश्व के सबसे ऊंची स्थल पर युद्ध लड़ा जाता है।

हम सब यह जानते हैं कि जम्मू-कश्मीर राज्य में बहुत सारी पर्वत श्रेणियां है और वहां का मौसम अक्सर ठंडा ही रहता है।  जम्मू और कश्मीर भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है। इस वजह से  उस राज्य को सुरक्षा देना भारतीय सेना का कर्तव्य  हैं। हम आए दिन जम्मू-कश्मीर पर हमलों की खबरें सुनते ही रहते हैं। देश की सेवा करते हुए और भारत के सर के ताज समान जम्मू-कश्मीर की रक्षा करते हुए की वीर सैनिक शहीद हो जाते हैं।  दुश्मन राष्ट्र द्वारा  भारत पर हमले के खतरे हर दम बने रहते है और  इसलिए हमारी भारतीय सेना को हर वक्त ही चौकन्ना रहना पड़ता है। हमारे देश का ” सियाचिन ” ही विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध स्थल है

सियाचिन हिमालय के पूर्वी कराकोरम रेंज में भारत-पाक नियंत्रण रेखा के पास स्थित है। इस युद्ध स्थल को लेकर अक्सर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव रहता है। इस लिए ही यहां पर हर दम सैन्य तैनात रहता है।सियाचिन  समुद्र तल से 16 से 20 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है|

यह युद्ध स्थल बहुत ही सवेंदनशील क्षेत्र है। फिर भी यहां पर हमारे देश के जवान बहुत सी मुश्किलों का सामना करते हुये भी दिन रात देश की पहरेदारी करते रहते है| यहाँ बहुत ज्यादा ठण्ड रहती है तथा तापमान 0 से 70 डिग्री सेल्सियस नीचे तक चला जाता है। इतनी ठंड में भी हमारे वीर जवान दिन और रात पहरेदारी करते रहते हैं।

सियाचिन ग्लेशियर कहाँ है?

सियाचिन ग्लेशियर को पूरी दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित युद्ध स्थल के रूप में पहेचाना जाता हैं। सियाचिन ग्लेशियर; पूर्वी कराकोरम / हिमालय, में स्थित हैं। इसकी स्थिति भारत-पाक नियंत्रण रेखा के पास लगभग देशान्तर: 76.9°पूर्व, अक्षांश: 35.5° उत्तर पर स्थित हैं। समुद्र तल से इसकी औसत ऊँचाई लगभग 17770 फीट है. सियाचिन ग्लेशियर का क्षेत्रफल करीब 78 किमी है. सियाचिन, काराकोरम के पांच बड़े ग्लेशियरों में सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर हैं।

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सियाचिन ग्लेशियर विवाद क्या है?

सियाचिन विवाद के बारे में: समुद्र तल से औसतन 17770 फीट की ऊंचाई पर स्थित सियाचिन ग्लेशियर के एक तरफ पाकिस्तान की सीमा है तो दूसरी तरफ चीन की सीमा “अक्साई चीन” इस क्षेत्र में हैं। भारत को इन दोनों देशों पर नजर रखनी पडती है इस लिए ही इस अतिसंवेदनशील क्षेत्र में अपनी हरदम  सेना तैनात करना बहुत जरूरी हैं। साल1984 से पहले इस जगह पर भारत और पाकिस्तान  दोनो देशो में से कीसी भी देश की सेना की उपस्थिति नही थी

सियाचिन विवाद की वजह:

साल 1972 के शिमला समझौते में सियाचिन क्षेत्र  को बेजान और बंजर विस्तार घोषित किया गया था। लेकिन इससमझौते में दोनों देशों के बीच सीमा का कोई भी निर्धारण नही हुआ था। साल 1984 के करीब भारत को ख़ुफ़िया जानकारी मिली कि पाकिस्तान सियाचिन ग्लेसियर पर कब्ज़ा करने के योजना बना रहा है और वह यूरोप की किसी कंपनी से “विशेष प्रकार के “गर्म सूट” बनवा रहा है, लेकीन भारत ने भी  फौरी तोर पर ऐसे ही खास सूट तैयार करवा लिये और पाकिस्तान से पहले सियाचिन ग्लेशियर (बिलाफोंड ला पास -Bilafond La pass) पर 13 अप्रैल 1984 को अपनी सेना तैनात कर दीकब्जा कर लिया । सेना द्वारा इस क्षेत्र के कब्जे के लिए यहाँ पर “ऑपरेशन मेघदूत”चलाया गया था । ऐसाज्ञातव्य भी है कि अगर ये सूट पाकिस्तान को हाथ लग जाते तो पाकिस्तान की सेना इस जगह पर हमसे पहले पहुँच जाती

पाकिस्तान की सेना ने भी 25 अप्रैल 1984 को इस जगह पर चढाई करने के प्रयत्न कीए किंतु कुदरत नेभी उन्हें साथ नही दिया और ख़राब मौसम और बिना तैयारी के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा था। उस बाद 25 जून, 1987 को पाकिस्तान ने 21 हजार फुट की ऊँचाई पर क्वैड पोस्ट (Quaid post) नामक पोस्ट बनाने में सफलता हासिल कर ली थी क्योंकि हमारे देश की सेना के पास गोला-बारूद ख़त्म हो चुका था। चूंकि हमारे देश के सैन्य ने यहाँ पर पहले से कब्ज़ा कर लिया था इसलिए इस ग्लेशियर के ऊपरी भाग पर भारत और निचले भाग पर पाकिस्तान का कब्जा है। भारत यहाँ पर लाभदायक स्थिति में बैठा है। साल 2003 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम संधि हो गई थी। उस समय से इस क्षेत्र में फायरिंग और गोलाबारी होनी बंद हो गई है लेकिन दोनों ओर की सेना तैनात रहती है।सियाचिन में भारत के 10 हजार सैनिक तैनात हैं और इनके रखरखाव पर हर दिन 5 करोड़ रुपये का खर्च भी आता है।

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सियाचिन की ठण्ड के बारे में:

सियाचिन में सैनिकों की नियुक्ति 18000 से 23000 फीट की ऊँचाई पर होती है और यहाँ का तापमान माइनस 55 डिग्री तक गिर जाता है क्योंकि इस क्षेत्र में 22 के लगभग ग्लेसियर हैं। सियाचिन ग्लेसियर में स्थिति इतनी ज्यादा विकट होती है कि शरीर को जितनी ऑक्सीजन की जरुरत होती है उसकी केवल 30% आपूर्ति ही इस जगह मिल पाती हैं। यहाँ पर सैनिकों को घुटनों तक बर्फ में घुसकर चलना पड़ता हैं। एक स्वस्थ सैनिक भी  कुछ कदम चल पाता है और यदि किसी सैनिक के दस्तानों, जूतों में पसीना आ जाता है तो वह कुछ ही सेकेंड में बर्फ मेंयः ही बदल जाता है जिससे तपावस्था (hypothermia) और शीतदंश (frostbite) जैसी बीमारियाँ उसकी जान की दुश्मन बन जातीं हैं।

सियाचिन ग्लेसियर में ठंडी का अंदाजा तो हम इसी बात से लगा सकते है कि यहाँ पर यदि जवान कुछ देर तक अपनी उंगलियाँ बाहर निकाल ले तो उनकी उंगलियाँ गल जाती हैं। यहाँ तक कि राइफल भी जम जाती है और मशीन गनों को भी चलाने से पहले गर्म पानी से नहलाया जाता हैं।.

यहाँ पर जवानों को उनकी जरुरत के हिसाब से खाना  यानी हर दिन 4000-5000 के कैलोरी वाला नही मिल पाता है और 3 से 4 महीनों में ही उनका वजन 5 से 10 किलो तक कम हो जाता हैं। यहाँ रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन द्वारा विशेष रूप से तैयार किया गया खाना भेजा जाता  हैं। जवानों को हमेशा स्टोब को जलाकर बर्फ से पानी बनाना पड़ता हैं लेकिन आग/ईंधन की योग्य व्यवस्था नहीं होने के कारण यह काम भी उनके लिये बहुत ही कठिन हो जाता है। एक आश्चर्य की बात  आपको बता दे की इस क्षेत्र में सैनिकों की मौत की मुख्य वजह भारत और पाकिस्तान के सैनिकों की बीच लड़ाई नही बल्कि यहाँ के मौसम की विपरीत परिस्तिथियाँ  हैं।. एक अनुमान के अनुसार अब तक दोनों देशों के 2500 जवानों को यहां अपनी जान गंवानी पड़ी है।

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निष्कर्ष:

इस प्रकार आपने हमारे इस आर्टिकल में पढ़ा कि विश्व का सबसे उंचा युद्ध स्थल कौन सा है? साथ ही आपने यह भी जाना की सियाचिन ग्लेसियर में भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई का मुख्य कारण क्या है और हमारे देश के जाबांज सैनिक कैसी विषम परिस्तिथियों में यहाँ रहकर देश की सीमा की रक्षा कर रहे हैं।हम यह ऊम्मीद है कि यह आर्टिकल आपको रोचक लगा होगा और आपकी जानकारी में भी इजाफा हुआ होगा।

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